03 August 2012

अन्ना टीम को देखना होगा कि क्या इनमें दम है ....

मेरे प्रोफ़ाईल को देखने मे लगता है कि देश की दुर्दशा की तक्लीफ़ सबसे बडा भार मेरे उपर ही है ............ पर अन्ना रामदेव के सैकडो हजारॊ और सच कहे तो पुरे देश मे कई करोडो लोगों का यही हाल है .......... कि वे घर शहर और देश को बनाने का सपना देखते है .......... अन्ना जैसे लोग कितनी जल्दी सफ़लता पा लेते है जिसको समझ्ने की जरुरत है ........ बाबा राम देव ने एक वैज्ञानिक राजीव दिक्षीत के साथ देश के हालात और राजनीति पर शोध किया और उसके समाधान पर विचार कर जन जागरण का काम शुरु किया ...... एक संवाद मे राजीव भाई ने कहा कि पुरी सफ़लता के लिये 470 करोड रु लगभग चाहिये और ये पैसा व्यापारियो या अन्य से न लेकर आम नागरिक और वोटर से लेने है ........ रामदेव बाबा को पहुचने मे जहाँ कई साल लग गये जब उन्होने कई करोड लोगों से बहुत छोटी सी रकम ली है और अन्ना जी को केवल कुछ दिन ही लगे इस प्रकार के अनसन कर के ......... बहुत अधिक लोग जुटा लिये .... पर आज से कुछ दिन पहले तक जहाँ पर अनशन मे कोई नही जुट रहा था वहा पर रामदेव के साथ हजारो की भीड आयी और फिर वही डटी रही .......... अन्ना भी जोर शोर से बोल दिये " जब तक शरीर मे प्राण है तब तक अनसन है " ये बोलना क्या हुआ लोग भी जोश मे आ गये और अन्ना जिन्दाबाद के नारे लगा के मैदान मे समर्थन करने लगे ......... पर अन्ना और अन्ना टीम को देखना होगा कि क्या इनमें दम है .... अन्ना - मिलेट्री भागे हूये (छोड्कर आये ) केजरीवाल - IRS से भागे हुये (छोड्कर आये ) कुमार विस्वास - पी सी एस - यु पी से भागे हुये (छोड्कर आये ) किरन बेदी ने भी समय से पहले पद का त्याग कर दिया .......... और तो और इन सब को वहा से निकले कई साल हो गये है पर किसी मे इस प्रकार की न तो निति याद आयी और न ही कोई आन्दोलन ही हुआ ये एक संयोग था क्या ............. १४ नम्बर को जब पहली कामन्वेल्थ को लेकर f I R - दर्ज करायी तो ये सब रामदेव के कहने पे मौजूद थे फिर इनहोने रामदेव के आन्दोलन को धत्ता बता के एक आन्दोलन और शुरु कर दिया ............. कल तक अन्ना अन्ना करने वाले देश पे मर मिट्ने वाले लोग अन्ना की इस आवाज पे आ गये " जब तक शरीर मे प्राण है तब तक अनसन जारी रहेगा " पर कहाँ गयी वो सच्चाई .................. कहाँ गयी वो दम ............कहाँ गया वो गाँधी ............... मै जहाँ तक जिस गाँधी को जानता हूँ उसने कभी हार नही मानी ............... कही ये मजिलों से भागने वाले लोग जनता को पार्टी इत्यादि बना के बीच रास्ते मे न छोड दें तो ये पोल मे 96 % जनता कौन है जनता न्युज से ये भी जाननी चाहेगी और ये % का प्रयोग क्या है कल से % स्तर वही का वही रहा क्या जनता भी कम जादा वोट नही कर रही वो केवल वही और वही हा और न का % वाला वोट कर रही है............. सवाल अन्य चैनलो पे दिखाये जाने लोगों की राय मे पार्टी एक भी आदमी इसको सही नही मान रहा है कि अन्ना पार्टी बनाये खुद अन्ना भी कह चुके है कि वो न कही कोई पार्टी या पक्ष बनायेगें अब तो जनता भी जानने लगी है कि अन्ना उम्र दराज के आदमी है और इनको आराम की जरुरत है पार्टी युवा लोगों को बनाने की जरुरत है ये काम रामदेव को ही करना चाहिये वो ही इसके लिये सर्वोक्त्म होगा आगे का रास्ता कौन तय करेगा ............... जनता या सत्ताधारी की चालाकी

03 May 2012

सौ साल के सिनेमा और .... आज

कहते है कि ... जब जब समाज मे जिस नई चीज का विरोध होता है ... आने वाले समय मे समाज उसी का गुलाम हो जाता है ........ सौ साल के सिनेमा ने आज (आर्थिक युग)कुछ किर्तीमान ले लिये हों पर .... कुछ दिनो पहले तक समाजिक उपेक्षा से भी सारोकार होना पड़ा है । लोगों ने इसका विरोध भी किया है औरदेखने वाले खुब कोसे भी जाते थे ..... कुछ यही हाल विदेशी चैनलओ को लेकर हुआ तब mtv आदि को लेकर हाय तौबा हुयी ........ और बही चैनल एक नयी जनरेशन को पागल किये हुये है ..... कुछ भी हो .....जिन फिल्मो ने विपरीत हवाओ मे अपने को ढाल लिया ..... जिन अभिनेता अभिनेत्रीयों ने विपरीत परस्थीतियों मे काम किया ........ उनका लोहा आज भी उतना ही खरा है जितना पहले था ...... लेकिन एक खतरा भी है आज के सिनेमा मे वंशवाद भाई भतिजावाद....... आगया है ... और ये हर उस ...कलाकार को रोकता है जिसका जन्म अभिनय के लिये हुआ है और कही न कही उसे एक दलदल मे भी धकेलता है जिसका कोई मन्जिल नहीं होती ...... सौ साल ....... बाद सिनेमा किस रंग मे रंग रहा है ...... और इसकी कहानियाँ क्या कह रही है एक तरफ़ सिविक्ल का दौर है ..... मतलब कहानियों का टोटा ..... और दुसरी तरफ़ .... बरबरा ... लिओन .. जैसे लोगों को .... बालिबुड मे जडें जमाने के लिये जमीन दी जा रही है ... क्या सतीश कौशिक ... रजनीकांत .. जैसे कलाकार ने जो मुकाम हासिल किया ...उसके लिये शारिरिक सुन्दरता चाहिये... ? जाने भी दो यारों ... की लोकप्रियता क्या कोई तोड नही है और तो और ... महंगी से महगी फ़िल्म वो मिठास नही दे सकती जो जाने भी दो यारो ने दिया..... अतत: -.. रीयल्टी शो को रीयल होना पडे़गा ... और सिनेमा को व्यबसाय से हटकर .. व्यव्हारिक होना पडेगा...... फ़िल्मी भविष्यव्क्ता कुछ भी कहे ...... पर आने वाला समय ... बहुत कुछ कहने वाला है ........

28 March 2012

आज जो हुआ वो शर्मसार था देश के लिये !, सरकार के लिये ! , सेना के लिये
! , जनता के लिये !

28 - 3 -12 के दिन आज एक समाचार ने पूरे मिडिया मे हडकमप मचादिया.

अभी तक मैने जो मिडिया और समाचारो के माध्यम जो भी पाया है वो आपको भी
बताता हुँ ...
वि के सिंह रिटायर होने वाले है दो महिने के बाद ... और आने वाले है
विक्रम सिह .. विक्रम
सिंह जी बहूत चर्चे मे रहे है अपनी पाकिस्तान बाली बहु के कारण ...और भी
इनके चर्चे है

पिछले कई सालो से लगभग 40 सालो से (ndtv india @ prime time with raveesh
..today @ 9.00 pm )
इस प्रकार की बातें पहले भी आ चुकी है पर आज तक कभी खुलासा नही हुआ ।

खबर निकल के आयी कि बात थी 14 करोड के लेन देन की तो ........
रक्षा मंत्री को बताया गया तो उन्होने माथा पीट लिया .......... माथा पीट
लिया इस बात को
मिडिया समझाने मे लगा है पर जितना समझा सकता है उसको समझने की जरुरत है ..

एक सबाल आपसे ..
आप माथा कब पीटते है .. जब बना बनाया काम गलत होता है ......या आप
अचम्भीत होते है ....

इसके उलट पंजाब मे .... आज बंद रहा .. आगजनी रही ... होहल्ला रहा ....
यूँ कहे तो वहाँ हल्ला बोल रहा ! किसके लिये और क्यो .....!

लगभग सभी जानते है कि बलवंत सिंह राजोआना की फांसी जो कि 31 मार्च को है
इन पर आरोप है पंजाब
के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या का .. सचिवालय के अन्दर बम
बिस्फोट करना ........ उसमे 17 लोगो का
साथ मे मारा जाना ...उसमए मुख्यमंत्री भी मारे जाते है और ये सब हुआ 17
साल पहले .......!

उसके बाद बलवंत ने कभी भी अपने उपर लगे इलजाम के लिये ... न तो सुप्रीम
कोर्ट गया ... और न ही
राष्ट्रपति के पास दया क्षमा याचना की ! ... और तय समय पे फासी लेने के
लिये आज भी तैयार है .....
ये भी कितना आश्चर्य जनक है कि .. जिसको फासी मिली है उसको सरकार , जेल
अधिकारी . मुख्यमंत्री ,
सहयोगी दल के लोग बचाना चाहते है .........पर वो उनकी भी आलोचना करता है
...... पर क्यो ...!


सच मे इस प्रकार भगत सिंह ने भी सचिवालय ...... मे बम फेक कर अपने ....
अपने आदर्शो के लिये
हसते हुये फासी पर चढ गये थे ... उस समय की सरकार के लिये .... इतना सर
दर्द हुये कि उन्हे समय
दिये गये आदेश ... और समय से पहले ही फासी पे लटका दिया गया ....

ये देश जितना उपर लिखे लोगों का है उतना ही शायद आपका भी
............................

05 February 2012

पीपा और सोफ़ा की कहानी

पीपा और सोफ़ा की कहानी अमेरीका मे फ्लाप हो गयी हो पर
अब ये मुसीबत भारत की ओर आने वाली है । एक बडी कम्पनी
बाबा गुगल (ऐनक) ने अपनी घोषणा करते हुये ये कहा कि अब वो
आपकी प्राईवेसी को गोपनीय नही रखेगें ।
अधिक जानकारी के लिये ये पढे न ये पढे बल्कि इसके सभी हाईपर
लिंक को भी अवश्य पढे़ ।

ये सन्धि मार्च २०१२ से होगी पर क्या आप तैयार है .............

http://www.google.co.in/intl/hi/policies/privacy/preview/

http://www.google.co.in/intl/hi/policies/privacy/preview/faq/#toc-terms
ऐसा ..... बहूत कम होता है पर कभी कभी ऐसा भी होता है ।
हर काम पहली बार अवश्य होता है .... और।

पहली बार ऐसा ही हुआ है !

हरदोई मे , बहूत कूछ पहली बार हो रहा है .... ।

पहली बार ... विधान सभा मे BSP ने सारी सीट जीतीं
जो हारी थी वो भी .........

... पहली बार ... .. हरदोई मे जिला पचायत अध्यक्ष OBC कोटे
मे गया और बच गया ........

पहली बार ... .. सुरसा विधान सभा मे सुरसा का अंत हो गया
(सुरसा के बारे मे कहा जाता है कि वो परछाई को पकड के
अपना शिकार करती थी )

पहली बार ... .. चुनाव मे बैनर पोस्टर की जगह जन सैलाब
की जरुरत जादा हो रही है ..... ।

पहली बार ... .. सत्ताऒ के आकडे आम लोगों के समझ से बाहर है ।

पहली बार ... ....... नेता से अधीक मीडिया चिला रहा है ।
बस FM. नही है नही तो गाँव वाले भी नही जान पाते .........

पहली बार ... न जाने और .. क्या क्या होगा ........पहली बार ... ?

31 January 2012

य़ू एन की सड़क पे चलने के लिये
अमेरिका , अमेरिका क्यो नाटो के द्वारा बनाये गये
नियम कानून के आधार लाई+सेन्स=(जिसका अधार ही झुठ है )
लाईसेन्स लेना होगा जो असल मे समाजवाद से दूर दूर तक कोई रिस्ता नही है वो तो केवल व्यापारवाद को बधाता है

वो कहते है कि एक रेस की जाये और जो जीते वो इनाम का हकदार , ये दौड है विकास की दौड


विकास की दौड़ मे दौड़ने के लिये
जनता रुपी गाडी को
महगाई के एक्सीलेटर से इतना दवाया जाता है कि बस .....
उसमे जनता को पिसते ही चले जाना है और इस बार जनता के हाथ मे चाभी है जिससे वो
आने वाले समय मे देश को एक नया प्रधानमन्त्री बना सकती है ।

24 January 2012

बहुत ही शर्मसार था मेरे लिये ........

कई दिनो से सोच रहा था कि मै कुछ कहुँ या चुप रहुँ
पर समय और बदलते परिवेश मे शान्त रहने का मन बनाया
पिछले दिनो एक मित्र के वाल से प्रचार देखा कि टी वी शो
मे हरदोई मे शूट हुआ कोई कार्यक्रम आने वाला है
मन वयाकुल हुआ और समय को ध्यान मे रख उसको देखा
शहर देख कर अच्छा लगा और ये भी देखा कि कोई भी शुटिग
हरदोई मे नही हुय़ी बल्कि उसके द्र्श्य फिलमाकर फिर उसे
एडिट कर वही मुमबई मे फिलमाया गया

हरदोई और एक खास धर्म को शर्मसार किया है क्यो पता नही
और जब हरदोई शर्मसार हुआ तो उसका जस्न के रुप दिया गया
यह कि ज़ी टी वी पे भागोवाली धारावाहिक के 300 एपीसोड पुरे हुये ।

हरदोई बाबा नाम से हरदोई का सबसे महत्यपुर्ण धर्मस्थल है ,
और इसका एक अदभुत इतिहास रहा है जो कि बाप दादाओ से
सुनते चला आ रहा हुँ

दुखद घटना का परिचय ये है कि इस धारावाहिक मे वास्तविक्ता लाने
के लिये पहले लखनऊ और फिर कानपुर के दॄश्यों का दिखाया जाना
फिर हरदोई का दिखाया जाना जैसे कि ये वास्तविक हो और उसी मे
एक लड्की को जुता माता का दिखाया जाना अत्तयन्त ही घोर निन्दनीय है ।
जहाँ वो सस्कृति माता के रुप मे गंगा माता , भारत माता , गौ माता
इत्यादी को देखता है वहीं जूता माता कहकर अपमान किया जा रहा है
इसमे जिस प्रकार से दिखाया गया है वो बहुत ही उत्तेजक है एक पार्ट मे
तो भगवान शिव व इत्यादी के चित्र भी दिखाये गये है ।
क्या मनोरंजन का स्तर इतना घटिया हो गया है कि कोई आधार
ही नही रखा गया है

सवाल ये है कि क्या कोई धर्म अपने धर्म स्थल पे किसी को
जूतापहन के जाने की अनुमति देगा ।
क्या जो दिखाया गया वातावरण था वो इसे बरदासत करेगा
जूता किसी पे चला देने से तो कोहराम मच जाता है
तो कोई सम्मान क्यो देगा ?

ये धारावाहिक वनाने वाले और हरदोई को दिखाने वाले
शायद ही जानते हो कि हरदोई मे बहुत सी सच्ची कहानिया
है दिखाने के लिये ...... कुछ साल पहले एक नवयुवक को
केवल २० रु के पीछे मार दिया गया एक थाने मे ये न तो
खबर आयी न कोई धारावाहिक बना । वैसे ही एक नवयुबक
पुलिस जब मार रही थी तो तो वह भारत माता कि जय
बन्दे मातरम कह रहा था और उस पे फर्जी केस लगा दिये
गये ये आजादी के बाद पहली घट्ना होगी ।
शायद उसे भी मार डाला गया ॥॥

सवाल कई है और जबाब खुद ही देना होगा क्योकि
हरदोई के नाम का भद्दा मजाक कहा तक सही है
क्या मनोरंजन के लिये किसी धर्म को शर्म सार किया जाये
इसको नजर अन्दाज कहा तक सही है

ये धारावाहिक 23 जनवरी 2012 को ज़ी टी वी पे सुबह 9.00 बजे और 10.30 रात को
भागोवाली आया था ये बहुत ही शर्मसार था मेरे लिये ........

31 December 2011

पाश्चात संस्कृति के आने वाले नये साल की आप सब को हार्दिक शुभकामनायें

नये साल का आना उत्साह जनक होता है और ये उत्साह को बढाता भी है जब येनया साल अगर पाश्चात संस्कृति का हो तो तामसी प्रबति के लोगो के लिये ये सबसे अच्छा और अतिआवश्यक अंग है । क्यो ?
क्योकि जो भी नये साल मे किया जाता है जो कुछ भी वो हमारी संस्कृति मे नही होता है अगर आप जरा सोचे तो आप को एक तरफ़ भारत मिलेगा और दुसरी तरफ़ इंडिया ये सोच है दो संस्कृतियों की जो एक महानगरों मे रहती है और
दूसरी जो गाँवो मे रहती है
आज जो भारत है (पूरा देश) वो क्या है
भौगोलिक क्षेत्रफल मे (विश्व) - 7 वाँ देश ,
अर्थवयव्स्था मे विश्व का - 4 वाँ देश , (नयी घोषणा के अनुसार तीसरा )
जन्संख्या मे - दूसरा न०
जन्संख्या घनत्व मे - 131 वाँ (लगभग)
प्रतिव्यक्ति आय मे - 129 (लगभग)

मानवीय विकास मे - 134 वाँ


जो संस्कृति गाँव मे रहती है उसे भारत कहते है वो नये साल मे ध्यान नही
देती और वो साल मे अन्य त्यौहार मनाती है उस का तोड पूरे विश्व मे
नही मिलेगा वो है होली और दीपावली । एक तरफ़ रंग ही रंग है और दुसरी तरफ़
रोशनी ही रोशनी और रोशनी से जगमग करता पूरा का पूरा भारत एक ही समय पे
इसी से भारत जुडा हुआ है। इसी मे वो रंग है जो एक व्यक्ति से दूसरे
व्यक्ति सेमिलना आवश्यक माना जाता है और समाजिक खबरों का एक मात्र माधयम है ये
भारतीय पर्वे उत्साह भरे होते है और सामाजिक भी ।

दुसरी ओर है एक सर्द रात और कान फोडू संगीत इस संगीत मे आप कोई बात नही
कर सकते है तो क्या कर सकते है बस बंदरो की तरह हिल सकते है कुद सकते है
और उछल भी सकते है क्योकि सब यही कर रहे होते है इसमे बने पकवान और साथ
मे ली जाने वाली पेय पदार्थ सामग्री तो कितनी घातक होती है कि आप अपने घर
परिवार के बच्चो को नही दे सकते है । और ये संस्कृति है पाश्चात शैली की
जिसका सार केवल और केवल व्यबसाय व्यापार ही होता है कोई भी सिंद्धान्त का
अंत देखिये तो आपको अंत प्रोफ़िट ही दिखेगा और वही अंत है ।

पर एक सवाल है कि समाज है क्या ! पैसा... या आत्मियता .... ..

24 December 2011

पुराना साल अंत पे है और नये साल की तैयारी है ,
बीते साल मे महगाई ने खून के आँसू रुलाये और जनता 100 दिन के दिलासे मे
राह देखती रही कि एक दिन दुख दुर होगा ,
जहाँ जनता सरकार की कमजोरी से परेशान थी वही इस अवसर को तलासते कुछ गाँधी
और बाबा ने सरकार को घेर लिया ,
सरकार के अपने दुख है और इसी दुख से जनता खुश क्योकि अगर आपको परेशान
करने वाला अगर परेशान हो जाये तो
आपका भला न सही आपको प्रसन्नता तो जरुर मिलती है ।

परेशानी मे पुरा विश्व है जहाँ एक साल से अधिक विद्रोह के बाद कुछ
सत्ताये तो हिलायी गयी पर कुछ को उखाड फेकने के लिये
नाटो नाम की संस्था भी साथ आयी पर जब एक ग्राफ़ देखता हुँ जिसमे एक खास
कौम के लोगो का देश के आधार पर तुलनात्मक
अधयय्न करता हूँ तो पाता हूँ कि ये वही देश है जहा पर इस कौम का घनत्व
अधिक है वही ये विद्रोह हो रहे है ये है टुनिसिया , लीबिया,
मिश्र, यमन, और कुछ देश है जो दादाओ की धुरती निगाहों से अपने आपका बजूद
बचा रहे है ये है ईरान ,अफ़गानिस्तान ,पाकिस्तान

ईरान ने एक वो काम कर दिखाया जो शायद विश्व का सबसे बडा हैकर नही कर पाया
जी हा जुलियन असांजे ने केवल कुछ सरकारी केबल
को ही खुलासा किया पर मायाबती के खुलासे मे पहली बार तू तू मै मै दिखाय़ी
दी और इस से खास लोगों का संयम दिखने लगता है ।
इसी खुलासे मे ये बात भी आयी कि जो केवल वाली बात है वो अमेरिकियों
द्वारा दिया गया था । पर ईरान ने क्या किया ये जानते है
ईरान ने अमेरीका के उस ड्रोन को पट्खनी दी जिसने सारी दुनिया को डरा
रक्खा है एक खबर के मुताबिक अमेरिका का ड्रोन जब ईरान के
क्षेत्र मे उड रहा था तो उसको किसी तरह मदद से नीचे उतार लिया गया और फिर
अमेरिका के खिलाफ़ घुसपैठ का मुकदमा भी लिखवा दिया गया ।
पर यदी एसा हुआ है तो क्या आने वाले समय मे मानव रहित विमान जैसे ड्रोन
का भविष्य क्या होगा जब ये कुछ खास उपकरण से हैक किये जा सकेगे।

आई टी क्षेत्र का आका भारत ने कामनवेल्थ गेम की निगरानी के लिये कुछ टोही
विमान ईज्ररायल से लिये थे । वो करोडो के विमान इस लिये बेकार हो गये
क्योकि उनको उडाने के लिये सेटलाईट के सिगन्ल नही मिल रहे थे जो भारत् को
कबर करे ये इजराइल धरती है ईसा मसीह के जन्म की ..और कल इनका जन्म दिन
है
आप सभी को हैप्पी क्रिस्मस ......

23 December 2011

कमेन्ट आज के दिन बाजपाई ब्लॉग

सडक से ससद तक और संसद से सड़क तक का मार्ग का गेट है - चुनाव


ये चुनाव ही तय करता है कि कौन संसद जाये और कौन सड़क पे रहे और इस गेट का चौकीदार है जनता ।
ये चौकीदार देख तो सकता है
पर न बोल सकता है और न ही चल सकता है
न ही इसके पास लाठी है और न ही ये सीटी बजा सकता है ।

जैसे 121 करोड की जनता मे 11 करोड ही सरकार चुनती है और..
110 करोड को गर्व है भारतीय होने पे और नेतओ को चुनकर अपना वोट बेकार नही करना चाहते है
और अनेकता के कारण इधर उधर देखा करते है ।

क्योकि ये 11 करोड ही वोट बैक है क्योकि ये ही सरकार तय करता है तो क्या कोई ऎसा सिस्टम है कि कम से कम पप्पू पास हो जाये 60 नही तो 33 ही सही पर पास हो जाये ।

चौकीदार अगर सही देखने लगा और रोकने और टोकने की ताकत आ गयी तो चोर कभी भी लोकत्रंत के मन्दिर मे जा कर उस के गहने नही चुरा पायेगा ।

कुछ लोग 3 साल से पत्थर (समस्या )रगड रगड के आग पैदा कर रहे थे और कह रहे थे कि ये आग आप की उर्जा के रुप मे काम करेगा ।

अंग्रेजी मे एक कहावत है कि line को बिना छुये छोटी करने के लिये क्या उपाय है । बहुत से लोग जानते है कि अन्ना का आना और कुछ मुद्दे का पीछे होना । क्या एक इतेफाक है , क्या संसद की बढी तारीख और उसके बाद अन्ना का अनसन भी उनही तारीखों तक क्या है ।

खैर आम के पेड गिनने की जरुरत नही बस चौकीदार इतना ज्ञान वाला हो जाये कि वो चीजे <विज्ञापन>समझ ले ,देख ले , जान ले , बोल सके ,

क्योकि संघर्ष अभी बाकी है ...........

तो जाने कि चुनाव आ गया है ,

सब दुकाने सज गयी ,
सब चोर दहाडने लगे ,
हमसे पाक साफ़ कौन छोड कर,
दुसरो को आईने दिखाने लगए ,
तो जाने कि चुनाव आ गया है ,

गाँव गाँव मे जब दौडे गाडी ,
बटती है महिला को साडी ,
जगह जगह बैठे जुगाडी ,
तो जाने कि चुनाव आ गया है ,

जब अध्धा पौया बट जाये
जब गरीब को पीटा जाये
जब गुंड्डो को पुजा जाये
जब मुफ़्त दावते मिल जाये
तो जाने कि चुनाव आ गया है ,


पर क्या सवाल उठाये है
और क्या जबाब पाये है
ये कौन है जो चुनाव लड्ने आये है
और क्यो इतने सगे बन रहे है

क्यो न जाने हम इनकी पोल
क्यो न हम देखे इनका खोल ....... अगली बार ........

आ देखे ज़रा किस्मे है कितना दम

http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8237661391245852817&postID=2204687205621783006

27 October 2011

मेरी एक दुनिया है जिसके किरदार इस दुनिया से मिलते है और ये दुनिया बिल्कुल ही अलग है बिल्कुल ही अलग
कुछ सवाल है मेरी दुनिया के आप बताईये कि क्या सही है ?
1- उत्तर प्रदेश मे एक पर्टी के नेता के बेटे ने साईकिल चलाते हुये कहा कि अगर सत्ता मे आउन्गा तो सारी मुर्तीया पर बुल्दोजर चलवा दुन्गा ।

-- : -- चलवा दिजियेगा सहाव , पर ये बात तो आप के पिता जि भी बोले थे और जब बाप कुछ नहि कर पाया तो क्या बेटा कर पायेगा ।

----:--- येशा तो उस मुर्ती वाली माता ( उमर के कारण) ने भी काहा था कि एक विशेश पार्क पर बुल्डोजर चलवायेगी पर पता नही सत्तता मे आकर न जाने वो वात भूल गय़ी ।

---:---- वैसे ये पैसा पवलिक का है और ये घाटा भी पवलिक का ही होगा । और इस घाटा की भरपाई तो केवल महन्गाई से जनता नही कुछ वोल पा रही है वर्ना ..............

11 August 2011

हम गुलाम है तो
वो आजाद क्यो है ? - अन्ना टीम

हम गुलाम है तो
हम गुलाम क्यो है ? - रामदेव

15 अगस्त को 1947 हम

15 अगस्त से PM ,SC , HC 1.5 करोड सरकारी नौकर को गुलाम बनाने की तैयारी

राष्ट्रपति (राष्ट्र) कब गुलाम होगा ?

08 July 2011

ब्लॉग से हिंदी हो गयी लापता चमत्कार हो गया
हिंदी भाषियों पे जैसे अत्याचार हो गया
हो गया राम लीला पे राम देव जैसा हाल
गूगल हो गयी कपिल ब्लोगेर हुए बेहाल
--
अम्बरीष मिश्रा

24 June 2011

क्या ! -- बदलोगे तुम

क्या क्या बदलोगे ,
क्या बदलोगे तुम
हिन्दुस्तान में
पकिस्तान में
और अपने नाम में

क्या बदलोगे तुम इस दुनिया में
जब सब बदल गए है
जिन्दा मर गए है
कलेजे गल गए है

क्या बदलोगे तुम
दूध घी मिल्लता नहीं
और खुल गए मैखाने है
तुम्हारे सपने बैमानी
और उनके सपने अफसाने है

क्या बदलोगे तुम
गाव में बच्चे माँ का खून पी जी रहे है
और शहरों में माँ बियर पी जी रही है

क्या बदलोगे तुम
सब कुछ तो बदल गया
इमानदार एक गाली है
फूलो का चोर ही माली है
अमीर देश है ये
और घर घर कंगाली है

और क्या बदलोगे
सभ्यता संस्क्रति या धर्म
कुछ नहीं बदला
बस बदल गयी पहचान
कपडे बदले बोली बदली
और बदले अरमान
घर छूट गया
परिवार टूट गया
सब कह रहे है मतलबी इंसान
और क्या बदलोगे तुम
अपनी या मेरी - पहचान


23 June 2011

एक मुस्कान
एक अहसास
एक दिन
एक रात
एक शब्द
एक रह
एक मंजिल
एक रास्ता
एक रौशनी
एक सुरुआत
एक बाबा
एक राम लीला
एक सरकार
एक रात
एक हाहा कार
एक न्यायलय
एक केस
एक लडाई
एक समझ
एक सबूत
एक बार
एक हार
एक विदेशी
एक देशी
एक स्वदेशी
एक जीत
एक विस्वास
एक बार
बार बार
जीत होगी इस बार

20 June 2011

राज भरा वो ख़त .............

यूँ तो ख़त लिखने का सिलसिला तो बंद हो गया है और अगर ख़त लिखा भी गया है तो प्रेम में नौकरी के लिए कार्यालय के लिए | पहले ख़त लिखा जाता था कैरियत के लिए और आज चाहत के लिए |
लेकिन पिछले दिनों एक चमत कार हुआ एक ख़त के कारण बहुत बड़ा चमत्कार जो काम देश की जनता मिडिया और समाज सेवी ने न किया वो ख़त कर गया | वो ख़त क्या था ...............

दिन 13 जून : अन्ना ने ख़त लिखा सोनिया जी को ..................
दिन २० जून : सोनिया जी ने अन्ना जी को ख़त लिखा .............
दिन २१ जून : अन्ना जी वार्ता में खुश थे कपिल जी भी वार्ता में खुश थे और बारता भी अच्छी हुयी |

येषा क्या था की एक पत्र में की जो जनता का डर नहीं जो किसी का खौफ नहीं वो जो हर बात बात पे खीचा तानी करते थे बात बात पे बैमानी करते थे वो डर गए एक पत्र से जो न डरे पत्रकार से जुटे की बौछार से

क्या था उस पत्र में

18 June 2011

मायाजाल (INTERNET) को धोखा दे !



भाईयो दोस्तो और प्रसशक ,
जैसा कि आज कल हमरी खाश face book के कारन दिन प्रतिदिन हम अप्ने भावनये और तुरन्त प्रतिकिया online के द्वारा भेजते है । और यही हमरी समस्या बन जाती है क्योकि भले हमरी सरकार से इस प्रकार का कोई अन्होनी नही होती है पर कुछ विदेशी इस पर नज़र रख्ते है और वो हमरी हिन्दी को अग्रेजी मे भाषा रुपान्तरण कर आसानी से समझ जाते है
इस के लिये आप मेरा एक कमेट देखे़गे कि किस प्र्कार एक CIA या कोई खुफिया विदेशी विभाग ने हिन्दि के लेख मे मेरे द्वारा दिये गये वचन पर तुरन्त ही प्रतिक्रिया दी । एक विदेशी द्वारा इस प्रकार का वय्व्हार मेरे लिये सच मे सोचने की बात थी तो आपकी खबर ने भी मुझे सम्पर्क किया और जान्ना चाहा या वो कोई और था ।
पर मेरे द्वारा जबाब से वो सन्तुस्ट था ।
ये खबर है 25 aprail 2011 की जिस्मे ये बात हुयी है , जरा सोचिये कि ये कित्ना घातक है हमरे लिये कि हमारी भाव्नाओ को कोई पड रहा है और बाद मे वो व्यापार करेगा और हमरी मेहनत को दिमा़ग के बल पर ले जयेगा ।
ये खबर क्यो जरुरी है और इस से कैसे बचे
आप अपने लेख मे कुछ खास नाम , काम , या क्रिया को सीधे न लिख कर उसे भ्रमित भाषा मे लिखे ये समझ्ने योग्य हो क्योकि मशीने इत्ना दिमाग नही रख्ती है कि वो समस्या का समाधान कर सके
ये कैसे कर्ना है अगर मै ये कहु कि मन्मोहन ने दिलली मे ओबामा से मिले तो अगर मै कोइ शब्द बद्ल दु तो उस्को सुधारा जा सक्ता है पर यदि मै हर सब्द को हि पर्वर्तित कर दुन और उस्का आसय सम्झा दुन तो ये उत्तम रहे़गा ।
कहा जाता है कि जब महान ज्योतिश नास्त्रे दमस की सीधी भविश्य्वानी पर रोक लगा दी तो उस्ने कविताऒ के मधय्म से बात कहना सुरु किया इस पर्कार ही हम लोग भी कर सक्ते है और अपने सम्बादो को सुरछित कर सक्ते है
जैसे हन्होहन ने हिल्ली मे होवामा से मिले इस्मे कोइ कम्पुटर नहि सम्झ सक्ता और ना हि कोइ और इस्का तोड जल्दि जल्दि निकाल सक्ता है
तो आगे से आप मेरे कमेट पर परेशान नहि होन्गे

17 May 2011

Re: kavita

ममता की जीत ने एक नया रंग लाया
वेचेन राहुल ने  नया तीर पाया
नया जोश भर कर खेली  नयी चाल
मनमोहन से बोले तू  राजा भोज मै गंगू तेली
मैं गंगू तेली बात मेरी मान
 ये किसान ही है राजनेताओ का भगवान
 भगवान जो एक हो जाये
सरकार गिराएगा हमें जितायेगा
सुनो जरा धयान से बंगाल में हुआ कमाल
टाटा ने किया अधिग्रहण उस पर फैला ममता माया जाल
लड़की का हुआ बलात्कार और दिया मार
ये आग फैलाई यह सुन मेधा समेत कई समाज सेवी आये
हाय तौबा से टाटा को दिया  भागा 
उसी चिंगारी को सुलगा सुलगा कर
आग जलाई लाल झंडे  को दी बंगाल से विदाई
चिंगारी से आग बनाई
आज उसी आग पर रोटिया सेक खाई
आने वाले चुनाव के लिए ये मुद्दा मलाई

हम इस मुद्दे को उठायेगे
और ममता के तरह राज पायेगे



कभी सोचा न था ......... कि आप भी.... मेरे ब्लोग पे होंगे !